कथा समापन पर निकालीं शोभायात्राएं: सकल समाज छावनी और महेश्वरी समाज ने कथा समापन पर निकाली श्रीमद्भागवत की शोभायात्रा

Hindi NewsLocalMpAgar malwaSakal Samaj Cantonment And Maheshwari Samaj Took Out Procession Of Shrimad Bhagwat At The Conclusion Of The Story

आगर मालवा6 घंटे पहले

नगर छावनी राधा कृष्ण पंचायती मन्दिर और सत्यनारायण गली स्थित अस्तल के मंदिर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शनिवार की शाम शोभायात्रा के साथ समापन हुआ। इस दिन दोनों जगह कथा स्थल से शोभायात्रा निकाली गई। बैण्डबाजों की धार्मिक धुन पर नाचते झुमते श्रद्धालु कृष्ण भक्ति में चूर नजर आए।

शोभायात्रा का समापन कथा स्थल पर ही किया गया। इस दिन छावनी में कथा वाचक बाबुलाल उपाध्याय ने श्रीकृष्ण भक्त एवं बाल सखा सुदामा के चरित्र का वर्णन किया। मित्रता पर उन्होंने कहा कि मित्र एक ही बनाना, लेकिन सच्चा मित्र ही बनाना, क्योंकि मित्र यदि सच्चा हो तो कोई परेशानी आपको छू भी नहीं सकती और मित्र यदि सच्चा नहीं है तो थोड़ी सी परेशानी भी आपको बेचेन कर देगी।

उन्होंने सुदामा और कृष्ण की मित्रता के बारे में बताते हुए कहा कि श्री कृष्ण ने अपना सब कुछ अपने बाल सखा को दे दिया था। मनुष्य स्वंय को भगवान बनाने के बजाय प्रभु का दास बनने का प्रयास करे क्यों कि भक्ति भाव देख कर जब प्रभु में वात्सल्य जागता है तो वे सब कुछ छोड कर अपने भक्तरूपी संतान के पास दौडे चले आते हैं। कथा के अंत में महाआरती की गई।

मित्रता का सुमेरु है सुदामा चरित्र- पं. मनावत जी

जिसकी मंत्रणा मंत्र जैसी पावन हो, उसे मित्र कहते हैं। मित्रता का संबंध धन से नहीं, मन से होता है। मित्रता स्वार्थ का नाम नहीं अपितु सौहार्द्र होती है। मित्रता का आधार सामाजिक प्रतिष्ठा नहीं, अपितु हृदय की स्पष्ट निष्ठा है। मित्रता में ऊंच-नीच नहीं, भाव की गहराई है। इसलिए कृष्ण सुदामा की मैत्री जगत विख्यात है। यह विचार माहेश्वरी समाज के द्वारा सत्यनारायण गली स्थित अस्तल के मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिवस पंडित श्याम मनावत ने व्यक्त किए। इस दिन अस्तल मंदिर आगर में चल रही श्रीमद् भागवत महापुराण कथा का विराम हुआ और भव्य शोभायात्रा भी निकाली गई।

खबरें और भी हैं…

error: Content is protected !!