भोपाल में गूंजे हिंदी दिवस पर प्यार के सुर: मौलाना बरकतउल्ला भोपाली ने जापान की 100 साल पुराने इंस्टिट्यूट रखी थी में हिंदी-उर्दू की नींव, कवि सम्मेलन में बहा प्रेम रस


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भोपालएक घंटा पहले

राष्ट्रीय हिंदी दिवस के मौके पर राजधानी के रविंद्र भवन में कई साहित्यकारों का सम्मान समारोह व और कवि सम्मेलन आयोजित किया गया इस मौके पर पुरस्कृत साहित्यकारों ने हिंदी भाषा को लेकर अपनी बात रखी इस मौके पर प्रोफेसर है दया की इशिता ने ने भोपाल और जापान के हिंदी पर आधारित संबंध को बताते हुए कहा की 1908 में पहली बार जापान की राजधानी टोक्यो मैं हिंदी भाषा के फाउंडेशन कोर्स की शुरुआत हुई थी। प्रो इशीदा ने बताया की वहां हिंदुस्तानी भाषाओं की शुरुआत उसी दौर में की गई। सबसे खास बात यह थी की भारत से जापान जाकर पहली बार हिंदी और उर्दू भाषा की नीव एक भोपाली द्वारा राखी गयी थी। प्रो ने बताया की जापान में हिंदी भाषा की नीव रखने वाले कोई और नहीं बल्कि मौलाना बरकतुल्लाह भोपाली थे।

एमपी ने दिया हिंदी को सम्मान

इस अवसर पर सीएम शिवराज ने कहा की सही मायने में हिंदी को सम्मान भारत में मध्यप्रदेश राज्य ने दिया है। सीएम ने बताया आने वाले सत्र से ही एमबीबीएस पाठ्यक्रम में मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में शुरू की जाने वाली है। उन्होंने कहा, हिंदी हमारी आत्मा है। हिंदी दुनिया में तीसरे नम्बर पर बोले जानी वाली भाषा है। लेकिन यह दुख की बात है कि हिंदुस्तान में हमे हिंदी दिवस मनाने की जरूरत है। जब दुनिया के हर देश में मातृभाषा में पढ़ाई हो सकती है, तो भारत और मध्यप्रदेश में हिंदी में पढ़ाई क्यों नहीं हो सकती। सीएम ने पीएम मोदी का नई शिक्षा नीति लाने के लिए धन्यवाद ज्ञापित देता हूं ।इस मौके पर शिवराज ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई को याद करते हुए कहा कि, अटल जी पहले भारतीय प्रधानमंत्री थे जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र में जाकर हिंदी में संबोधन दिया। इसके साथ पीएम मोदी ने न्यू यॉर्क स्क्वायर जाकर भी हिंदी में संबोधन दिया।

कविताओं में हिन्दी की महिमा, सभागृह में बिखरे प्यार के अनेक रूप

इस कार्यक्रम के बाद कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। इसमें देश भर से आमंत्रित कवियों ने सभागार में बैठे हर व्यक्ति के मन को अपनी कविताओं से छुआ और क्षण भर में भाव का रिश्ता बना लिया। कवि सम्मेलन में नोएडा से की कवयित्री मधु मोहिनी उपाध्याय ने अपनी कविता से सभागार में प्रेम का रस घोल दिया। उन्होंने ‘हिन्दी कान्हा की बंसी सी है, सांसों में मधुर बसी है, अक्षर अक्षर है माला, गायन में मृदुल रसी है….।’

वहीं, हिन्दी के जाने-माने कवि श्री अशोक चक्रधर ने अपने कविता पाठ से पहले कहा कि आज हिन्दी दिवस पर याद आ रहा है भोपाल में सितंबर महीने में ही सम्पन्न हुआ 10वां विश्व हिन्दी सम्मेलन। बहुत सघनता से याद आ रही हैं श्रीमती सुषमा स्वराज, जो अंतर्मन से चाहती थीं कि हिन्दी संवैधानिक रूप से भारत की राष्ट्रभाषा कहलाये। गांधीजी के कथन का बार-बार उल्लेख करती थीं, ‘वह राष्ट्र गूंगा होता है जिसके पास कोई राष्ट्रभाषा नहीं होती।’ देश को एक सूत्र में बांधने के लिए एक तो होनी ही चाहिये राष्ट्रभाषा। भारत की सभी भाषायें हिन्दी को निरंतर समृद्ध और शक्तिवान बना रही हैं, यहां तक कि अंग्रेजी भी। इस तथ्य को अब स्वीकार कर लेना चाहिए कि अंग्रेजी भी एक भारतीय भाषा है।

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