वॉट्स एप चैट और FB मैसेंजर बनेगा एविडेंस: रैगिंग कांड में एमजीएम ने नहीं दिया जवाब, अब टेक्निकल जांच का सहारा


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इंदौरएक घंटा पहले

एमजीएम मेडिकल कॉलेज में जूनियर के साथ हुई रैगिंग के मामले में भले ही डिपार्टमेंट के डॉक्टरों ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। लेकिन पुलिस अपने इन्वेस्टिगेशन में कमी नहीं छोड़ रही। तीन बार एमजीएम मेडिकल कॉलेज और एंटी रैगिंग कमेटी ने जब पीड़ित छात्र के बारे में पुलिस को जानकारी नहीं दी तो इंदौर के अफसरों ने इसे अब टेक्निकल एविडेंस के माध्यम से सुलझाने का काम शुरू कर दिया है।

पुलिस ने अपने मुखबिरों के माध्यम से ऐसे सीनियर स्टूडेंट को चिन्हित किया है जो विवाद में रहते है। इस मामले में इंदौर पुलिस ने फेसबुक को लेटर लिखकर वॉटस एप चैट और मैसेंजर की जानकारी मांगी है। बताया जाता है कि छात्रों ने की गई चैटिंग को डिलीट किया है। जिस पर डिटेल आने के बाद पुलिस मामले में बड़ा एक्शन लेगी।

करीब दो माह पहले एमजीएम मेडिकल कॉलेज मे जूनियर स्टूडेंट के साथ रैगिंग के मामले में संयोगितागंज पुलिस अब सीनियर स्टूडेंट के खिलाफ टेक्निकल एविडेंस जुटाने में लगी है। इसके लिए TI तहजीब काजी ने फेसबुक को लेटर देकर 10 से अधिक संदिग्ध स्टूडेंट की जानकारी मांगी है। TI के मुताबिक छात्रों को जब थाने बुलाया गया तो उनकी गतिविधि भी संदिग्ध लगी। जिसके बाद टेक्निकल एविडेंस के तौर पर उनके नंबर फेसबुक को भेजे हैं। जिसमें मैसेंजर और वाट्स एप की डिटेल आने के बाद काम किया जाएगा।

तीन लेटर तीनों का गोलमोल जवाबTI तहजीब काजी के मुताबिक दो माह पहले जब एमजीएम मेडिकल कालेज की तरफ से दिल्ली से आए मेल के बाद केस दर्ज कराया गया था। तब पुलिस ने पीड़ित छात्र को लेकर जानकारी शेयर करने की बात कही थी। इस मामले में प्रबंधन गोलमोल जवाब देता रहा। बाद में लेटर लिखकर जानकारी मांगी गई। जिसमें दिल्ली की कमेटी पर अधूरी जानकारी देने की बात कही गई। जब प्रबंधन से दिल्ली की जानकारी मांगी तो उन्होंने शुरूआत में देने से इंकार कर दिया। जिसके बाद एक के बाद एक तीन लेटर एमजीएम मेडिकल कालेज को पुलिस ने दिए।

दिल्ली से भी छात्र की जानकारी नहीं दीइस मामले में दिल्ली की कमेटी से सीधे पुलिस ने मेल ओर लेटर पर चर्चा की। जिसमें पीड़ित छात्र का नाम और जानकारी शेयर करने की बात की। लेकिन डिपार्टमेंट ने सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन का हवाला दे दिया। जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा करते हुए फेसबुक से जानकारी मांगी गई है। पुलिस ने इस मामले में 20 के लगभग सीनियर ओर जूनियर को बुलाकर पूछताछ की। जिसमें दो जूनियरों ने बताया कि रैगिंग तो होती है। लेकिन कोन सीनियर करता है। इस बारे में जानकारी नही दी। अब पूरा मामला फेसबुक पर टिका हुआ है।

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