राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ: कैलाशजी ने कहा- ऋषि और मुनियों का तप हैै साहित्य

बड़वानीएक घंटा पहले

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भारत देश में साहित्य का समाज में बड़ा महत्व है। साहित्य के माध्यम से हमारी संस्कृति, परंपरा व ज्ञान को हम समझ सकते हैं। अगली पीढ़ी को दे सकते हैं। साहित्य हमारे ऋषि-मुनियों का तब है। उनके द्वारा जो ज्ञान अर्जित किया गया था, जो जीवन में व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है। वह सभी साहित्य में प्राप्त होता है। वर्तमान समय में साहित्य हर व्यक्ति-परिवार तक पहुंचे, इसके लिए राष्ट्रीय साहित्य प्रसार केंद्र शुरू हुआ है। साहित्य का विषय जीवन में उतारना, ताकि वह व्यवहार में नजर आए।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचार प्रमुख कैलाशजी ने एमजी रोड पर राष्ट्रीय साहित्य प्रसार केंद्र का शुभारंभ करते हुए उपस्थित प्रबुद्धजनों से से बातें कहीं। उन्होंने उदाहरण के रूप में बताया कि शहीद भगतसिंह के पास जो तीन किताबें थी, उसमें एक भगवत गीता थी। ऐसे ही उन्होंने साहित्य के महत्व को लेकर कई प्रसंग बताए। लक्ष्मीबाई पुरोहित की शुरू से ही अध्ययन में रूचि है, जो 90 वर्ष की उम्र में अब भी है।

नई पीढ़ी को साहित्य पढ़ने, समझने के लिए प्रेरणास्पद है। मालवा प्रांत के सह प्रांत प्रचार प्रमुख जयशंकर शर्मा, विभाग के प्रचार प्रमुख विजय यादव, अनुज कुमार, विवेक गुप्ता, माणक वडनेरे, अनिल भावसार, राजेश राठौड़, मनीष पुरोहित, दीपक जैमन, मनीष डोडवे, दीपक राठौड़, रोहित यादव, हीरालाल यादव सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन मौजूद थे।

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