MP के मॉडल अस्पताल में डिलीवरी बंद: 30 करोड़ से बने काटजू को चालू नहीं कर पाए, अब जेपी का गायनिक, पीडियाट्रिक विभाग करेंगे शिफ्ट

भोपाल32 मिनट पहले

मध्यप्रदेश का मॉडल हॉस्पिटल कहे जाने वाले जेपी हॉस्पिटल में डिलीवरी (प्रसव) की सुविधा बंद हो जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के अफसर जिला अस्पताल (जेपी हॉस्पिटल) से स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग और शिशु रोग विभाग को न्यू मार्केट के पास बने काटजू सिविल अस्पताल में शिफ्ट करने की तैयारी कर रहे हैं। इसके बाद जेपी अस्पताल के डॉक्टरों से लेकर शहर के लोगों में नाराजगी है। जेपी के कर्मचारियों और कई संगठनों ने पत्र लिखकर फैसले को निरस्त करने के लिए पत्र लिखा है।

देश का पहला जिला अस्पताल, जहां डिलीवरी की सुविधा होगी बंदस्वास्थ्य विभाग के फैसले के बाद जेपी हॉस्पिटल देश में पहला ऐसा अस्पताल होगा, जहां प्रसव की सुविधा नहीं होगी। जेपी हॉस्पिटल में रोजाना करीब 20 से 25 डिलीवरी होती हैं। यहां 150 बिस्तरों का स्त्री एवं प्रसूति विभाग संचालित है। वहीं, शिशु रोग विभाग में भी एनआईसीयू, पीआईसीयू मिलाकर 60 बेड हैं।

नाकामी छिपाने अफसरों ने बदला फैसलासूत्रों की मानें तो काटजू हॉस्पिटल को मेटरनल एंड चाइल्ड केयर (MCH)हॉस्पिटल बनाने के निर्देश दिए गए थे। छह महीनों से खाली पड़े अस्पताल को शुरू करने में नाकाम रहे अधिकारियों ने इसे चालू करने के बजाय जेपी अस्पताल का गायनिक और पीडियाट्रिक विभाग बंद करने का निर्देश दिया है।

कांग्रेस MLA ने विधानसभा में उठाया मुद्दाभोपाल दक्षिण-पश्चिम विधानसभा से विधायक पीसी शर्मा ने जेपी हॉस्पिटल के गायनिक और पीडियाट्रिक विभाग को शिफ्ट करने का मामला विधानसभा के मानसून सत्र में उठाया था। पीसी शर्मा का कहना है कि इस फैसले को अगर अफसरों ने नहीं बदला, तो जल्द ही कांग्रेस शहर में बड़ा आंदोलन करेगी। स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने के बजाय जिला अस्पताल में डिलीवरी बंद की जा रही है।

ये होगा नुकसान- केन्द्र सरकार के IPHS गाइडलाइन के अनुसार जिला अस्पताल में प्रसव सुविधा होना जरूरी है।- जेपी से गायनिक विभाग शिफ्ट होने से लक्ष्य की प्रोत्साहन राशि बंद हो जाएगी।- यदि किसी गर्भवती महिला को हार्ट अटैक आया तो स्थिति संभालना मुश्किल हो जाएगी।- शिशु रोग विभाग शिफ्ट होने की वजह से मुस्कान कार्यक्रम भी जेपी में बंद हो जाएगा।

सुल्तानिया से मिली राहत, जेपी में बढ़ेगी परेशानीनवाबी शासन काल में शुरू हुए सुल्तानिया जनाना अस्पताल को हमीदिया अस्पताल की नई बिल्डिंग में शिफ्ट किया गया है। इससे पहले 235 बिस्तरों के सुल्तानिया अस्पताल में अक्सर ढाई सौ से ज्यादा महिलाएं भर्ती रहती थीं। ऐसे में एक बिस्तर पर दो- तीन प्रसूताओं और गर्भवतियों को रखना पड़ता था। यही नहीं, सुल्तानिया अस्पताल में ब्लड बैंक न होने से प्रसूताओं के परिजनों को परेशान होना पड़ता था। काटजू सिविल हॉस्पिटल को करीब 30 करोड़ रुपए की लागत से बनाए गए काटजू को महिलाओं और बच्चों का डेडिकेटेड हॉस्पिटल बनाया जाना है।

ऐसे रहते थे सुल्तानिया के हाल

ऐसे रहते थे सुल्तानिया के हाल

छह महीने से खाली पड़ा 30 करोड़ का अस्पताल

पिछले साल जून के महीने में सीएम शिवराज सिंह चौहान ने नवनिर्मित काटजू हॉस्पिटल को 200 बिस्तरों का डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल बनाया था। केयर नाम का एनजीओ इस कोविड हॉस्पिटल का इस मार्च तक संचालन करता रहा, लेकिन कोरोना की तीसरी लहर खत्म होने के बाद मार्च में केयर संस्था ने काटजू अस्पताल को छोड़ दिया। तब से अब तक इस अस्पताल में नाम मात्र की ओपीडी संचालित हो रही है। अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर, ब्लड बैंक, आईसीयू, पीआईसीयू, एनआईसीयू सहित तमाम व्यवस्थाएं नहीं हो पाईं।

काटजू अस्पताल में कई अत्याधुनिक सुविधाएं

हॉस्पिटल 6 हजार वर्ग मीटर भूमि पर बना है।बिल्डिंग में आधारतल , भू-तल समेत कुल 5 तल बने हैं। जिसका निर्माण क्षेत्र 15 हजार 920 वर्ग मीटर है ।बिल्डिंग के निर्माण में 3 साल लगे। निर्माण एजेंसी लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की भवन शाखा है ।बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर 50 आईसीयू बेड है। तीसरी व चौथी मंजिल पर कुल 150 बिस्तर के वार्ड तैयार किए गए हैं। ये सभी ऑक्सीजन बेड है।उपकरण, औषधि और अन्य सामग्री राज्य शासन व केयर इंडिया संस्था ने उपलब्ध कराए हैं।मरीजों की सुविधा की दृष्टि से भवन में 3 लिफ्ट व रैम्प भी बनाए गए हैं।

काटजू के किस फ्लोर पर क्या

बेसमेंट-पॉर्किंग और लॉन्ड्रीभूतल- छह ओपीडी और इमरजेंसीपहली मंजिल- ओपीडी व वार्डदूसरी मंजिल-नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाईतीसरी मंजिल- मदर वार्ड व हाई डिपेंडेंसी यूनिटचौथी मंजिल- अन्य विशेज्ञता के वार्डपांचवी मंजिल- प्राइवेट वार्डखबरें और भी हैं…

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