स्वच्छता सर्वेक्षण: गारबेज फ्री सिटी मार्किंग में मिला जीरो, इसलिए 26वें पायदान नीचे खिसके हम

दमोह24 मिनट पहले

कॉपी लिंकलाड़नबाग पहाड़ी पर बने ट्रेचिंग ग्राउंड में खुले में फेंका जा रहा कचरा। - Dainik Bhaskar

लाड़नबाग पहाड़ी पर बने ट्रेचिंग ग्राउंड में खुले में फेंका जा रहा कचरा।

शनिवार को जारी हुए 2022 की स्वच्छता रैंकिंग में दमोह इस बार 26 अंक नीचे खिसक गया है। बीते साल दमाेह देश भर में 72वें नंबर पर था, लेकिन इस बार 98 नंबर पर पहुंच गया। कुल 7500 अंकों में से दमोह को कुल 4451 अंक प्राप्त हुए हैं। जिसमेें गारबेज फ्री सिटी पार्ट में 1250 अंकों में से शून्य अंक प्राप्त हुए हैं। गारबेज फ्री सिटी यानी कचरा मुक्त शहर है। जिसमें स्वच्छता टीम यह देखती है कि सार्वजनिक स्थानों, रिहायशी क्षेत्रों और बरसाती नालों तथा तालाबों आदि में कहीं पर भी खुले में कूड़ा पड़ा नजर न आए।

100 फीसदी कूड़ा प्रबंधन हो। ठोस कचरे और सीएंडडी वेस्ट यानी मलबे का निपटान हो। लेकिन दिल्ली से आई टीम को यह सभी जगह कमियां नजर आईं। भास्कर ने इस मुद्दे को कई बार उठाया, लेकिन जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया। जिसकी वजह से हमारे शहर की रैकिंग 26 अंक नीचे खिसक गई।

बीते साल कोरोना के चलते स्वच्छता सर्वेक्षण टीम ने जनवरी की बजाय मार्च माह में शहर की सफाई व्यवस्था का जायजा लिया था। जिसमें शहर के 39 वार्ड में भ्रमण के अलावा लोगों से फीडबैक, शौचालयों की स्थिति, सुलभ कांपलेक्स, बस स्टैंड सहित अन्य सार्वजनिक स्थलों पर सफाई व्यवस्था की रिपोर्ट तैयार की थी। स्वच्छता सर्वेक्षण की शुरुआत 2014 से हुई थी। जिसमें दमोह को देश का सबसे गंदा शहर घोषित किया गया था। जिससे दमोह की काफी किरकिरी हुई थी। इस बात से सबक लेते हुए नगर पालिका द्वारा अपने संसाधनों में बढ़ोत्तरी के साथ सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाने लगा।

इसके बाद नगर पालिका एवं आमजनता के प्रयासों से दमोह को लगा गंदगी दाग वर्ष 2018 में धुल गया। जिसमें दमोह को देश भर में 103 रैंकिंग मिली थी। इसके बाद वर्ष 2019 में 78 वीं रैंकिंग, 2020 में 80 एवं वर्ष 2021 में 72वीं रैंकिंग प्राप्त हुई थी। लेकिन इस बार रैकिंग खिसककर 98 नंबर पर चली गई है। जिसका मुख्य कारण जिम्मेदारों द्वारा महत्वपूर्ण बिंदुओं की अनदेखी करना है।

लापरवाही के कारण हम 26 अंक पीछे खिसकेशहर में प्रतिबंध के बावजूद भी पॉलीथिन की बिक्री लगातार जारी है। जिससे नालियों से सबसे अधिक पॉलीथिन का कचरा ही निकलता है। शहर में कई जगह सड़कों पर कचरा फेंका जाता है। जो दोपहर तक पड़ा रहता है। नगर पालिका द्वारा गीला एवं सूखा कचरा अलग-अलग एकत्रित नहीं किया जाता है। ट्रेचिंग ग्राउंड पर खुले में कचरा फेंका जा रहा है। गीले कचरे से खाद बनाने की मशीन भी बंद पड़ी हैं। शहर के तालाबों में गंदगी भरी पड़ी है।

अच्छी बात ओडीएफ में ++(डब्ल प्लस) हुएइस बार हमारे शहर को एक और उपलब्धि हासिल हुई है। बीते साल ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त शहर) में शहर की स्थिति ओडीएफ + थी, जबकि इस बार हमें ++ हासिल हुए हैं। यह शहर के लिए अच्छी बात है। इसके अलावा सफाई कर्मचारियों द्वारा शहर की मुख्य सड़कों पर रात के समय झाडू लगाई जाती है, जिससे सुबह सड़कें साफ-सुथरी नजर आती हैं।

जो भी कमियां हैं, उन्हें सुधारा जाएगाहमने अपने कर्मचारियों व संसाधनों से पूरी मेहनत के साथ कार्य किया। अभी भी हमारी रैकिंग 100 के अंदर है। जो भी कमियां रह गई हैं, अब उन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। -भैयालाल सिंह, सीएमओ नगर पालिका दमोह

खबरें और भी हैं…

error: Content is protected !!