70 साल पुराने भवन की छत गिरी: छत पर उगे पीपल के पेड़ को उखाड़ने पर हुआ हादसा, 3 घंटे में दो निकाले

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ग्वालियर41 मिनट पहले

मलबे में फंसा कर्मचारी घनश्याम विश्वकर्मा अपने हाथ से इशारा करता हुआ

मुरार के अल्पना टॉकीज के पास की घटना

ग्वालियर के मुरार में 70 साल पुराने दो मंजिल भवन की छत अचानक धसकने से उसमें दो कर्मचारी दब गए थे। यह भवन में तीन दुकानें संचालित होती हैं। पहले दूसरी मंजिल की छत पहली मंजिल पर गिरी फिर पहली मंजिल की छत धसक गई। हादसा भवन की छत पर उग आए पीपल के पेड़ को उखाड़ने पर हुआ है। भवन काफी पुराना और जर्जर है। घटना सोमवार शाम 6.30 बजे की बताई गई है।

एक कर्मचारी को करीब 30 मिनट बाद निकाल लिया गया था, लेकिन एक अन्य युवक लगभग 3 घंटे से फंसा रहा। उसको दो बार ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचाया गया था। रात 9.30 बजे उसे निकाला गया है। पहले फायर बिग्रेड की टीम रेस्क्यू में लगी थी, लेकिन रात 9 बजे एनडीआरएफ ने मोर्चा संभाल लिया था और मलबे में दबे युवक को बाहर निकाला। पर जब रात को पता लगा कि एक और दबा है तो एनडीआरएफ फिर से रेस्क्यू में जुट गई है।

एनडीआरएफ और फायर बिग्रेड की टीम रेस्क्यू करते हुए

एनडीआरएफ और फायर बिग्रेड की टीम रेस्क्यू करते हुए

शहर के मुरार कंपनी बाग रोड अल्पना टॉकीज के सामने नगर निगम द्वारा बनाए गए भवन हैं। यहां 70 साल पुराना दो मंजिल भवन है। जिसमें सबसे नीचे रमेश झा की महादेव इलेक्ट्रीकल्स के नाम से शॉप है। दाे दुकान ऊपर हैं। महादेव इलेक्ट्रीकल्स पर शंकर विश्वकर्मा कर्मचारी है। सोमवार शाम ऊपर की दोनों दुकानों पर कोई नहीं था। शंकर से उसका फुफेरा भाई घनश्याम विश्वकर्मा उससे मिलने आया था। इस भवन की छत पर कुछ सालों से एक पीपल का पेड़ उग आया था। जिसे निकालने के लिए महादेव इलेक्ट्रीकल्स के मालिक ने कर्मचारी शंकर से कहा था। शंकर छत पर पेड़ को निकालने गया था और घनश्याम उसके साथ है। जैसे ही दोनों ने पेड़ को उखाड़ा छत तेज आवाज के साथ आ गिरी। दोनों नीचे आगर गिरे और ऊपर से पटियां और मलबा उनके ऊपर आ गया। आसपास के लोगों ने जब हादसा देखा तो तत्काल पुलिस और फायर बिग्रेड को सूचना दी। फायर बिग्रेड की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू शुरू किया। करीब 25 मिनट की मशक्कत के बाद शंकर को निकाल लिया गया है। उसके दोनों पैर बुरी तरह कुचल गए हैं। सिर और सीनें गंभीर चोट है। एम्बुलेंस की मदद से उसे जेएएच पहुंचा दिया गया है, लेकिन उसका फुफेरा भाई घनश्याम विश्वकर्मा वहां मलबे में फंसा हुआ था।3 घंटे के रेस्क्यू के बाद मलबे में फंसे युवक को निकाला- घनश्याम को मलबे से सुरक्षित निकालने के लिए 3 घंटे तक रेस्क्यू जारी है। पहले फायर बिग्रेड की टीम रेस्क्यू कर रही थी, लेकिन जब बात उनके हाथ से निकल गई तो एनडीआरएफ को कॉल किया गया। करीब 9 बजे एनडीआरएफ की टीम ने मोर्चा संभाला। इसके बाद 9.30 बजे उसे सुरक्षित निकाल लिया गया है। फिलहाल वह गंभीर घायल है और उसे एम्बुलेंस की मदद से अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अभी टीम यही सोच रही थी कि अंदर कोई नहीं है तभी किसी ने बताया कि एक और दबा है। जिसका नाम राहुल है। पर वह कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। टीम उसकी तलाश में जुट गई है।प्रत्यक्षदर्शी का कहना- मनीष मालवीय का कहना है कि मैं दुकान के बाद ठेले पर पेटीज खा रहा था। तभी अचानक तेज आवाज आई और पता लगा कि महादेव इलेक्ट्रीकल्स की छत अंदर गिर पड़ी है। पहले सूचना यह थी कि पांच लोग फंसे हैं। फिर पता लगा कि तीन लोग हैं। जब मैं अंदर पहुंचा तो दो लोग फंसे होने की सूचना मिली थी। एक को तो हम ही फायर बिग्रेट की टीम के साथ बाहर निकालकर लाए हैं।

दो बार आया खाली सिलेंडरमलबे में फंसे लोगों के लिए दो बार मुरार जिला अस्पताल से दो बार ऑक्सीजन सिलेंडर मंगाया गया था। पर दोनों बार मुरार अस्पताल से खाली सिलेंडर भेजा गया था। जो भयानक लापरवाही थी। यहां मलबे में दबे लोगों की जान पर बन आई थी। इसके बाद मध्य प्रदेश बीज निगम के अध्यक्ष मुन्नालाल गोयल ने फटकार लगाई और अधिकारियों को कॉल किया तो जिला अस्पताल से तीसरा ऑक्सीजन सिलेंडर भरा हुआ भेजा गया।

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