काशी से 9 गुना बड़ा है महाकाल लोक; VIDEO: शिव के अलौकिक संसार को कल राष्ट्र को समर्पित करेंगे प्रधानमंत्री मोदी

आनंद निगम। उज्जैन5 मिनट पहले

महाकाल लोक… शिव का अद्भुत, अकल्पनीय और अलौकिक संसार। महाकाल के आंगन के विस्तार के बाद जो भव्य और सुंदर दृश्य सामने आए, उसे हम महाकाल लोक के नाम से जानेंगे। 11 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे देश को समर्पित करेंगे। दिव्यता, भव्यता और आध्यात्मिकता के इस संगम ने 4 साल की मेहनत के बाद आकार लिया है। पहले फेज के बाद अब दूसरे फेज का काम होगा।

पूरे महाकाल लोक (फर्स्ट फेज) में 15 हजार टन राजस्थानी पत्थर लगाया गया है। महाकाल लोक पहले चरण में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से 4 गुना बड़ा है। दूसरे चरण का काम पूरा होने के बाद यह 9 गुना बड़ा हो जाएगा। पूरे कैम्पस को घूमने और दर्शन के लिए 4 से 5 घंटे का वक्त लगेगा।

सबसे पहले जानते हैं महाकाल लोक आखिर है क्या?महाकाल के आंगन को 856 करोड़ रुपए की लागत से 2 फेज में डेवलप किया जा रहा है। इसके पूरा होने के बाद 2.8 हेक्टेयर में फैले महाकाल का पूरा एरिया 47 हेक्टेयर का हो जाएगा। 946 मीटर लंबे कॉरिडोर पर चलते हुए भक्त महाकाल मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचेंगे। कॉरिडोर पर चलते हुए उन्हें बाबा महाकाल के अद्भुत रूपों के दर्शन तो होंगे ही, शिव महिमा और शिव-पार्वती विवाह की भी गाथा देखने-सुनने को मिलेगी।

महाकाल लोक के बनने के बाद यह एकमात्र ऐसा मंदिर बन गया है, जहां श्रद्धालु दर्शन के साथ शिव से जुड़ी हर कहानी जान सकते हैं। इसे बनाते समय पर्यावरण का भी विशेष ध्यान रखा गया है। हैदराबाद से विशेष पौधे मंगाए गए। इसके अलावा शमी, बेलपत्र, नीम, पीपल, रुद्राक्ष और वटवृक्ष भी रोपे गए हैं। विकसित एरिया महाकाल वन का हिस्सा है। यही कारण है कि इसे इसी अनुसार डिजाइन किया गया है।

अब इसकी कल्पना और इसे साकार रूप देने की कहानी जानते हैं…उज्जैन में करीब 47 हेक्टेयर में विकसित हो रहे महाकाल लोक की कल्पना स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के आने के साथ ही की गई। स्मार्ट सिटी में उज्जैन का नाम शामिल होते ही सबसे पहले 2.8 हेक्टेयर में फैले महाकाल के आंगन को सजाने के साथ ही विस्तार का सुझाव आया। महाकालेश्वर मंदिर में बढ़ती भीड़ को देखते हुए राज्य सरकार ने 5 साल पहले इसकी सैद्धांतिक सहमति दी। तब ये योजना 300 करोड़ रुपए की थी।

मंथन के बाद महाकाल परिसर के साथ रूद्रसागर तालाब को सजाने का प्लान तैयार हुआ। तय हुआ कि दो अलग-अलग फेज में विस्तार किया जाएगा। 2017 से 2018 में प्रोजेक्ट के लिए 870 करोड़ रुपए का बजट मंजूर कर डीपीआर और टेंडर निकाला गया। इसके बाद यहां मूर्तियां, म्यूरल के साथ परिसर को सजाने का काम शुरू हुआ। इसके लिए खासतौर पर राजस्थान का बंसी पहाड़पुर पत्थर बुलवाया गया।

चुनौतियां कम नहीं थीं… 800 घर हटाए, तब आगे बढ़ पाया काममहाकाल लोक की कल्पना को साकार करना चुनौतियों से भरा था। उज्जैन कलेक्टर आशीष सिंह बताते हैं- सबसे बड़ा चैलेंज 800 घरों और उनमें रहने वाले परिवारों को शिफ्ट करना था। यहां स्कूल भी थे। बच्चों की पढ़ाई का नुकसान भी नहीं होने देना था। मंथन के बाद सभी बच्चों को 2 स्कूलों में शिफ्ट किया गया। हर दिन नई चुनौती होती थी। कई सामुदायिक मुद्दे थे, जिनका भी समाधान करना था। अब दूसरा चैलेंज था- रूद्रसागर की सफाई। सीएम ने भी कहा- फंड की कमी नहीं आने देंगे, काम समय पर चाहिए।

रूद्रसागर के लिए मोड़ना पड़ी 12 हजार घरों की गंदगी…रूद्रसागर तालाब को साफ-सुथरा बनाने के लिए 40 लोगों ने डेढ़ महीने जलकुंभी हटाने के लिए दिन-रात एक किया। तालाब में आसपास के सीवेज का गंदा पानी गिरता था। कलेक्टर आशीष सिंह ने बताया- तालाब के कायाकल्प के लिए सबसे पहली परेशानी इसमें मिल रहे गंदे नाले ही थे। 12 हजारा घरों का सीवरेज रूद्रसागर में गिरता था। तालाब की खुदाई कर इसमें मिल रहे 5 सीवेज पॉइंट को बंद कर हाउसहोल्ड कनेक्शन कराने की प्रोसेस शुरू की। सीवरेज को बायपास कर अलग से लाइन डाली गई।

तालाब में नाले गिरना बंद हुए तो नया चैलेंज इसे भरने का था…रूद्रसागर में गिरने वाले नालों का पानी रोका गया तो अब एक और चैलेंज ये था कि इसमें सालभर पानी कैसे रहे। रूद्रसागर, नालों और बारिश के पानी से ही भरता था। ये पानी भी गर्मी में सूख जाता है। कलेक्टर आशीष सिंह ने बताया कि इसके लिए प्लानिंग की और शिप्रा नदी से रूद्रसागर को जोड़ा गया। इसके लिए बीच में एक पम्पिंग स्टेशन बनाया है। 9 महीने की मेहनत के बाद रूद्रसागर निखर गया। रूद्रसागर विस्तारीकरण के लिए 20 करोड़ की प्रस्तावित योजना में से 10 करोड़ रुपए तो सिर्फ सीवरेज रोकने और जलकुंभी हटाने में खर्च हो गए।

म्यूरल्स पर कथाएं उकेरने के लिए शास्त्र खंगाले, इन्हें स्वीकृत कराया…महाकाल लोक में 384 मीटर लंबी म्यूरल्स वॉल बनाई गई है। इस पर शिव की 25 कथाओं को 52 म्यूरल्स में प्रदर्शित किया गया है। इन कथाओं में अधिकांश शिव पुराण, श्रीमद् भागवत, देवी भागवत और अन्य ग्रंथों से लिया गया है। निर्माण एजेंसी के विशेषज्ञ विनोद झालावाड़िया कहते हैं- म्यूरल्स वॉल बनाना मुश्किल था। इसके लिए पौराणिक शास्त्रों को खंगालना, कथाएं तय करना, उन कथाओं को मंदिर समिति, पुजारी-पुरोहित, सांस्कृतिक समिति से स्वीकृत कराना धैर्य का काम था। इससे भी मुश्किल था, उन्हें बनाने के लिए कलाकारों का चयन। इन्हें बनाने में 10 महीने का वक्त लगा।

अब समझिए, महाकाल लोक को डिजाइन करने के पीछे की कहानीप्रोजेक्ट हेड कृष्ण मुरारी शर्मा कहते हैं- सबसे पहले क्राउड मैनेजमेंट को ध्यान में रखकर महाकाल लोक को डिजाइन किया गया। कुछ प्रोजेक्ट तैयार किए, वे बिगड़ गए। फिर नए तैयार किए, तो उनमें भी कुछ कमी रह गई। आखिरकार इंटरनेशनल टूरिज्म के बढ़ावे को ध्यान में रखकर प्रोजेक्ट तैयार किया। भक्तों की संख्या को ध्यान में रखा गया। हम कुछ ऐसा बनाना चाहते थे कि जो भी भक्त दर्शन करने आए, एक-दो दिन यहां रुके। ऐसा होने से शहर में टूरिज्म को बढ़ावा मिलने के साथ ही रोजगार के साधन भी बढ़ेंगे।

अगले 50 साल की प्लानिंग… देश का सबसे सुव्यवस्थित मंदिर होगा12 अक्टूबर से महाकाल मंदिर दर्शन व्यवस्था में देश का सबसे सुव्यवस्थित मंदिर हो जाएगा। यहां दर्शन व्यवस्था अगले 50 साल को ध्यान में रखकर बनाई गई है। उद्घाटन के बाद श्रद्धालुओं को सबसे बड़ी सुविधा बिना भीड़ के और कम समय में दर्शन की व्यवस्था मिलेगी। रात में सोने की तरह दमकने वाले महाकाल लोक में सुंदरता के साथ आम श्रद्धालुओं को शिवरात्रि, नागपंचमी और सिंहस्थ जैसे त्योहार के लिए दर्शन की ऐसी बेहतर व्यवस्था बनाई जा रही है, जो देश के किसी मंदिर में नहीं है। किसी भी त्योहार पर न तो महाकाल पहुंचने वाले वाहनों को शहर से दूर रोका जाएगा और न ही कई किमी पैदल चलना होगा। श्रद्धालुओं को पार्किंग से लेकर महाकाल दर्शन तक पहुंचने में सिर्फ 20 मिनट लगेंगे। एक घंटे में 30 हजार लोग दर्शन कर सकेंगे। व्यवस्था ऐसी होगी किएक दिन में 10 लाख श्रद्धालु भी पहुंच जाएं, तो उन्हें दर्शन कराए जा सकते हैं। ये फेस-1 की व्यवस्था है, जिसका उद्घाटन होगा।

प्लान में सिंहस्थ का भी ध्यान रखा…फेस-2 की तैयारियां भी पूरी हो चुकी हैं। इसमें सिंहस्थ को ध्यान में रखकर प्लान किया गया है। सिंहस्थ के दौरान इंदौर, रतलाम, देवास, मक्सी जैसे किसी भी शहर से उज्जैन आने पर सिंहस्थ मेले के डेढ़ किमी नजदीक गाड़ियां पार्क हो सकेंगी। लोगों को मेला क्षेत्र में पहुंचने के लिए न तो कई किमी पैदल चलना होगा और न ही किसी पास की जरूरत होगी। इस डेढ़ किमी क्षेत्र में भी तिरुपति की तरह बैटरी वाली सरकारी गाड़ियां चलेंगी।

30 सितंबर 2023 तक महाकाल आने वाले श्रद्धालुओं के लिए 2500 गाड़ियों की पार्किंग तैयार हो जाएगी। वहीं, सिंहस्थ को लेकर 7 हजार गाड़ियों की स्थाई पार्किंग व्यवस्था नदी के किनारे ही बनाई जा रही है। इसके लिए क्षिप्रा किनारे कॉरिडोर बनाने की योजना पर काम शुरू हो गया है।

कॉरिडोर को ऐसे मिला महाकाल लोक नाम…27 सितंबर को पहली बार उज्जैन में कैबिनेट बैठक हुई। अध्यक्षता उज्जैन के महाराज भगवान महाकाल ने की। टेबल की मुख्य सीट पर बाबा महाकाल की तस्वीर को आसीन किया गया। आसपास CM शिवराज और मंत्रिमंडल के दूसरे सदस्य बैठे। CM ने यहीं से कॉरिडोर को महाकाल लोक का नाम दिया। साथ ही कहा- महाकाल महाराज से सबके कल्याण की कामना करता हूं। महाकाल महाराज यहां के राजा हैं, हम लोग सेवक हैं। सेवक के नाते हम लोग महाकाल महाराज से प्रार्थना कर रहे हैं।

अब जान लीजिए सुविधा और विस्तार को…महाकाल लोक में प्रवेश करते ही शांति के साथ भक्ति का माहौल मिलेगा। यहां मिड-वे जोन के तहत पूजन सामग्री की शॉप, फूड जोन, रेस्टोरेंट की सुविधा मिलेगी। थीम पार्क के तहत महाकाल की कथाओं से युक्त म्यूरल वॉल, सप्तसागर के लिए डेक एरिया और डेक के नीचे शॉपिंग क्षेत्र और बैठने की व्यवस्था भी है। त्रिवेणी संग्रहालय के पास कार, बस और दोपहिया वाहन की पार्किंग बनाई गई है। इसमें 600 से अधिक गाड़ियां पार्क की जा सकेंगी। इसी क्षेत्र में धर्मशाला व अन्नक्षेत्र भी बनने शुरू हो चुके हैं।

रामघाट की ओर जाने वाले पैदल मार्ग का कायाकल्प, फेरी व ठेले वालों के लिए अलग से व्यवस्था है। वास्तुकलात्मक तत्वों के प्रयोग द्वारा गलियों का सौन्दर्यीकरण, रामघाट पर सिंहस्थ थीम आधारित डायनामिक लेजर शो किया गया है। छोटा रूद्रसागर लेक फ्रंट विकास योजना में लैंड स्केपिंग समेत मनोरंजन केंद्र, वैदिक वाटिका, योग केंद्र, मंत्र ध्वनि स्थल व पार्किंग का विकास हो रहा है।

ऐसा है शिव का अलौकिक संसार…

महाकाल लोक को चारों ओर से खुला बनाया जा रहा है। चार द्वार हैं- पिनाकी, शंख, नंदी और नीलकंठ। दूसरे फेज में एक या दो मुख्य द्वार और बनाए जाएंगे। इन चारों गेट से आप महाकाल लोक कैम्पस में प्रवेश कर सकते हैं। चारधाम रोड से पिनाकी द्वार मिलेगा। नीलकंठ द्वार बेगमबाग, शंख द्वार गणेश मंदिर के ठीक सामने और नंदी द्वार के लिए त्रिवेणी संग्रहालय के पास से रास्ता है।

महाकाल लोक का मुख्य द्वार नंदी है। यहां पहले पार्किंग है। कुछ आगे गणेश भगवान की बड़ी प्रतिमा है, सामने नंदी द्वार है। नंदी द्वार में प्रवेश करते ही ठीक सामने 108 स्तंभ हैं। इन स्तंभों पर भगवान शिव के नटराज स्वरूप की अलग-अलग मुद्राओं को उकेरा गया है। सीधे हाथ पर 25 फीट ऊंची दीवार पर शिव गाथा उकेरी गई है। उल्टे हाथ पर कमल सरोवर है। यहां महाकाल की प्रतिमा विराजित की गई है। भगवान शंकर यहां निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हुए नजर आ रहे हैं। इनके सामने 4 शेर बनाए गए हैं। इसी ओर रूद्रसागर भी है।

पिनाकी द्वार भी रुद्र सागर के किनारे से ही है। पिनाकी द्वार से घुसते ही नवग्रह के साथ गजानन और कार्तिकेय के दर्शन होंगे। त्रिपुरासुर वध की गाथा भी देखने-सुनने को मिलेगी। यहां छोटे से पार्क में त्रिशूल के साथ रुद्राक्ष, डमरू और ओम की आकृति उकेरी गई है। भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर के वध के समय धनुष उठाया था। ये धनुष पिनाक के नाम से जाना जाता है। द्वार के शिखर पर धनुष की आकृति भी बनी है।

आगे महाकाल पथ में 25 दीवारों पर करीब 52 और सप्तऋषि पर 28 म्यूरल बनाए गए हैं। सबसे बड़ा म्यूरल रूद्रसागर के सामने है। पूरे कैम्पस में कुल 81 म्यूरल बने हैं।

शिव का गुणगान करेंगी प्रतिमाएं…भक्तों को यहां नीलकंठ महादेव, सती के शव के साथ शिव, त्रिवेणी प्लाजा पर शिव, शक्ति और श्रीकृष्ण की प्रतिमाएं, कैलाश पर शिव, यम संवार, गजासुर संहार, आदि योगी शिव, योगेश्वर अवतार, कैलाश पर रावण की प्रतिमाएं शिव की महिमा का गुणगान करती मिलेंगी।

18 फीट की 8 प्रतिमाएं: नटराज, गणेश, कार्तिकेय, दत्तात्रेय अवतार, पंचमुखी हनुमान, चंद्रशेखर महादेव की कहानी, शिव और सती और समुद्र मंथन दृश्य।15 फीट ऊंची 23 प्रतिमाएं: शिव नृत्य, 11 रुद्र, महेश्वर अवतार, अघोर अवतार, काल भैरव, शरभ अवतार, खंडोबा अवतार, वीरभद्र द्वारा दक्ष वध, शिव बरात, मणिभद्र, गणेश व कार्तिकेय के साथ पार्वती, सूर्य, कपालमोचक शिव।11 फीट की 17 प्रतिमाएं: प्रवेश द्वार पर गणेश, अर्धनारीश्वर, अष्ट भैरव, ऋषि भारद्वाज, वशिष्ठ, विश्वामित्र, गौतम, कश्यप और जमदग्नी।10 फीट की 8 प्रतिमाएं: लेटे हुए गणेश, हनुमान शिव अवतार, सरस्वती, लक्ष्मी, पार्वती, लकुलेश, पार्वती के साथ खेलते गणेश।9 फीट की 19 प्रतिमाएं: यक्ष, यक्षिणी, सिंह, बटुक भैरव, सती, पार्वती, ऋषि भृंगी, विष्णु, नंदीकेश्वर, शिवभक्त रावण, श्रीराम, परशुराम, अर्जुन, सती, ऋषि शुक्राचार्य, शनिदेव और ऋषि दधिचि।

दूसरे फेज में इन्हें मिलेगा नया स्वरूप…महाराजवाड़ा बिल्डिंग को हेरिटेज होटल में तब्दील किया जाएगा। इसे सीधे मंदिर से जोड़ा जाएगा। पुलिस क्वार्टर और महाकाल थाने को हटाया जाएगा। उर्दू स्कूल वाले मैदान में पार्किंग और महाकाल थाना बनेगा। मंदिर के सामने एक नया कॉरिडोर बनेगा। रूद्रसागर पर ब्रिज और मंदिर के पास प्रवचन हॉल, अभिषेक स्थल बनाया जाएगा। यहां की सड़कों को भी चौड़ा किया जाएगा। इसके अलावा छोटा रूद्रसागर तट, रामघाट का सौंदर्यीकरण, पार्किंग व पर्यटन सूचना केंद्र, हरि फाटक पुल का चौड़ीकरण, रेलवे अंडरपास, महाकाल द्वार और प्राचीन बेगमबाग मार्ग को संवारा जाएगा।

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