मार्गदर्शन: सर्वाधिक बाल विवाह, अशिक्षा, बाल मजदूरी वाले 10 गांव बनेंगे बालमित्र गांव

शिवपुरी6 मिनट पहले

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जिले के चिह्निंत ऐसे गांव जहां सर्वाधिक बाल विवाह होते हैं, बाल मजदूरी के मामले सबसे अधिक हैं। और शिक्षा का स्तर भी इन गांव के बच्चों में सबसे कम है। इन बच्चों की देखभाल के लिए अब पोहरी विकासखंड के 10 गांव को अब बालमित्र गांव बनाया जाएगा। जहां विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलने के साथ-साथ 18 साल तक के बच्चों को पढ़ाई करना अनिवार्य होगा।

दरअसल अच्छा स्वास्थ्य, बेहतर शिक्षा और संरक्षण हर बच्चे का अधिकार है, यह उसे हर हाल में मिलना चाहिए। किंतु अज्ञानता तथा परिजनों के उपेक्षित व्यवहार के कारण अनेकों बच्चे इन अधिकारों से वंचित रह पढ़ाई से दूर होते ही इन बच्चों को बाल विवाह, बाल मजदूरी, शोषण जैसे विकास को प्रभावित करने वाले जोखिमों का सामना करना पड़ता है। आदिवासी समुदाय में अशिक्षा, बाल विवाह, बाल श्रम और बाल हिंसा की अधिकता को देखते हुए पोहरी विकास खंड के आदिवासी बाहुल्य 10 गांवों को बाल मित्र ग्राम बनाने चयनित हुए है।

चयनित गांव को बाल मित्र गांव के रूप में विकसित करने महिला एवं बाल विकास, जनपद, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, सामाजिक न्याय, जनजातीय कार्य विभाग,श्रम विभाग समन्वित रूप से प्रयास करेंगे। और कैलाश सत्यार्थी फाउंडेशन से पूरा तकनीकी सहयोग रहेगा। हर गांव में बाल संरक्षण समिति का गठन किया जाएगा, जिनमें सरकारी एवं गैर सरकारी लोग शामिल रहेंगे। कैलाश सत्यार्थी फाउंडेशन की ओर से गिर्राज धाकड़ को सामुदायिक संगठक के रूप में नियुक्त किया गया है।

यह गांव बनेंगे बाल मित्र ग्रामपायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर जिले में पोहरी विकासखंड के आदिवासी बाहुल्य 10 ग्रामों को चयनितहै। जिनमें परासरी, डाबरपुरा, ककरा, मड़खेड़ा, बिलबरा खुर्द, डिगडौली, गणेशखेड़ा, भरतपुर बछेड, जखनोद एवं भोजपुर गांव शामिल है। इन ग्रामों को प्रशासन एवं कैलास सत्यार्थी फाउंडेशन के तकनीकी सहयोग से बाल गांव के रूप में विकसित किया जाएगा।

18 साल तक का हर बच्चा नियमित स्कूल जाएगा”चयनित बाल मित्र गांव में 18 साल तक का हर बच्चा नियमित स्कूल जाएगा। गांव में कोई बाल विवाह नहीं होगा। कोई बच्चा बाल मजदूरी नहीं करेगा। कोई भी बच्चा कुपोषित और एनीमिक नहीं,बल्कि हर बच्चा स्वस्थ्य होगा। सभी बच्चे शोषण मुक्त होंगे और उनकी अपनी अलग बाल पंचायत होगी, जो बच्चों से संबंधित मुद्दों को हल करने के लिए कार्य करेगी। अभी इन गांव में कई सारी समस्याएं हैं जिनका समाधान होगा।”-राघवेंद्र शर्मा, बाल संरक्षण अधिकारी

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