महेश्वर में कर्मचारी संगठनों का शक्ति प्रदर्शन: पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर जुटे 20 हजार कर्मचारी, OPS नहीं तो-वोट नहीं

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भोपाल35 मिनट पहले

मप्र के कर्मचारी संगठन इन दिनों पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर लगातार धरना, प्रदर्शन और आंदोलन करते आ रहे हैं। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले मप्र सरकार और केन्द्र सरकार के लिए पुरानी पेंशन का मुद्दा बड़ी टेंशन बन गया है। आज खरगोन जिले के महेश्वर में प्रदेश के करीब 25 कर्मचारी संगठनों के करीब 20 हजार कर्मचारी जुटे हैं। कर्मचारी संगठनों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में सरकार से पुरानी पेंशन की जल्द बहाली की मांग की है।

इन कर्मचारी संगठनों के ये पदाधिकारी मंच पर मौजूद

आजाद अध्यापक संघ मप्रट्रायबल बेल्फेयर टीचर्स एसोसिएशनभारतीय आजाद परिषदसभी विभागों का पेंशनर्स एसोसिएशनआजाद पंचायत सचिव कर्मचारी संघमप्र पंचायत सचिव संगठनअध्यापक अधिकार संघमप्र हेल्थ ऑफिसर्स एसोसिएशनमप्र राज्य चिकित्सा शिक्षक संघप्रोग्रेसिव मेडिकल टीचर्स एसोसिएशनपंचायत सचिव, सहायक सचिव महासंघगुरूजी प्राथमिक शिक्षक संघराष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संघमप्र शिक्षक संघ के प्रदेशमप्र शासकीय शिक्षक संघराज्य शिक्षक कांग्रेसआम अध्यापक शिक्षक संघमप्र पटवारी संघप्रांतीय शिक्षक संघ मप्रमप्र ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संघमप्र पुरानी पेंशन बहाली महासंघव्यायाम अध्यापक संगठन मप्रमप्र समग्र शिक्षा शिक्षक उत्थान संघराज्य शिक्षक संघमहारैली के मंच पर मौजूद कर्मचारी संगठनों के नेतागण

महारैली के मंच पर मौजूद कर्मचारी संगठनों के नेतागण

कर्मचारियों ने लिया संकल्प OPS लागू करने वाले दल को देंगे वोट

महेश्वर में आयोजित पुरानी पेंशन महाकुंभ और महारैली में कर्मचारी संगठनों ने संकल्प लिया कि हमारा वोट पुरानी पेंशन देने वाले दल को जाएगा। मप्र चिकित्सा शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ.राकेश मालवीय ने कहा यदि ये सरकार पुरानी पेंशन नहीं देना चाहती तो आने वाले चुनाव में इसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ेगा। एक स्वर में कर्मचारियों ने कहा कि हमारा एक ही नारा है वोट फॉर OPS। कर्मचारियों ने हाथ उठाकर संकल्प लिया पुरानी पेंशन बहाली का आंदोलन जन आंदोलन बनाएंगे। समाज में इसके प्रति जागरूकता पैदा की जाएगी। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि सरकारी कर्मचारी पूरा जीवन जनता की सेवा में लगा देता है। ऐसी स्थिति में वृद्धावस्था में उसे सरकार की ओर से भरपूर मदद मिलनी चाहिए। सरकार को पुरानी पेंशन स्कीम लागू करना चाहिए। इसके अलावा वर्तमान परिस्थितियों को देखकर पेंशन दी जाना चाहिए। साल 2005 के बाद जो नई पेंशन स्कीम लागू हुई है उनकी नीतियों को लेकर मध्य प्रदेश सरकार खुद स्थिति स्पष्ट नहीं कर पा रही है। सरकार पूरी तरह पशोपेश में है. सरकार को तुरंत कर्मचारियों के हित में फैसला लेना चाहिए।

संकल्प लेते कर्मचारी गण

संकल्प लेते कर्मचारी गण

लगातार जारी रहेगा शक्ति प्रदर्शन

नेशनल मूवमेंट ऑफ ओल्ड पेंशन स्कीम मप्र के अध्यक्ष और महारैली के संयोजक परमानंद डेहरिया ने कहा कि मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक हम हाथ जोड़कर अपने बुढ़ापे में सहारा देने वाली पुरानी पेंशन बहाली कराने की मांग को लेकर गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई सुन नहीं रहा है। अब हम याचना नहीं करेंगे कर्मचारी अपना हक मांग रहे हैं। महेश्वर की महारैली के बाद लगातार कर्मचारियों की शक्ति का अहसास सरकार को कराते रहेंगे।

2004 में लागू हुई थी नई स्कीम

साल 2004 से अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने डिफेंस को छोड़कर बाकी सेवाओं में नई पेंशन स्कीम योजना लागू कर दी थी। मध्य प्रदेश सरकार ने इसी तर्ज पर एक जनवरी 2005 से योजना को लागू कर दिया. इस योजना के तहत अभी तक तीन लाख से ज्यादा कर्मचारी प्रभावित हो रहे हैं।

ये है दोनों में फर्क

नई पेंशन स्कीम योजना के तहत सरकारी कर्मचारियों के वेतन से 10 फीसदी की राशि जमा की जाती है, जबकि प्रदेश सरकार द्वारा 14 फीसदी अपनी ओर से राशि मिलाती है। इस प्रकार प्रतिमाह 24 फीसदी राशि जमा की जाती है, जबकि पुरानी पेंशन योजना में कर्मचारियों के वेतन से राशि नहीं काटी जाती थी। राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने अपने राज्य में पुरानी पेंशन योजना बहाल करने का ऐलान कर दिया, जिसके बाद अब मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी यह मुद्दा गरमा रहा है। अगले साल एमपी में विधानसभा चुनाव में ऐसी स्थिति में शिवराज सरकार पर भी पुरानी पेंशन योजना लागू करने का दबाव बढ़ता जा रहा है।

आर्थिक बोझ कम करने के लिए शुरू की गई थी योजनानई पेंशन योजना लागू करने का मुख्य उद्देश्य आर्थिक बोझ कम करना था, लेकिन कर्मचारी संगठनों द्वारा लगातार सरकारों पर दबाव बनाया जा रहा है। राजस्थान सरकार के फैसले के बाद मध्यप्रदेश में भी लगातार दबाव बन रहा है।

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