सेंट टेरेसा मामले में 9 हजार पन्नों का चालान तैयार: पुलिस ने धार, इंदौर और ग्वालियर से जुटाए दस्तावेज, 3 माह में तैयार हुआ चालान

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धार14 मिनट पहले

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धार में जनकल्याण के लिए दी गई जमीन को लेकर हुई धोखाधडी के मामले में गिरफ्तार हुए आरोपियों को लेकर पुलिस का कोर्ट के समक्ष पेश होने वाला चालान बनकर तैयार हो गया है। धार के इतिहास का सबसे बडा चालान सेंट टेरेसा प्रकरण का होगा, जिसमें सैकड़ों पन्ने जांच के दौरान पुलिस ने जप्त कर अपनी डायरी में शामिल किए। पुलिस ने अपनी ओर से 9 हजार पन्नों का चालान तैयार कर विभागीय कार्रवाई पूरी कर ली हैं, जल्द ही इसे अब धार कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा। पुलिस अभी गिरफ्तार हुए 31 आरोपियों को लेकर चालान पेश करने जा रही हैं, वहीं फरार चल रहे तीन मुख्य आरोपियों को लेकर आगामी कार्रवाई बाद में की जाएगी। चालान बनाने के दौरान पुलिस ने 6 नए आरोपियों के नाम चिन्हित कर लिए हैं, जिन्हें भी अब जल्द ही प्रकरण में शामिल कर लिया जाएगा। उन्हें चिंहित किया गया हैं, इसमें तत्कालीन समय के रहे तीन नपा के सीएमओ, उप पंजीयक सहित एक अन्य व्यक्ति शामिल है। जिसको लेकर भी साक्ष्य पुलिस के द्वारा जुटाए गए है।

दरअसल 27 नवंबर 2021 को आदर्श सडक पर स्थित सेंट टेरेसा कपाउंड को लेकर शिकायत धार एसपी को प्राप्त हुई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने जांच डीएसपी यशस्वी शिंदे को सौंपी, जिसके बाद इस भूमि के कई अहम कागज पुलिस के सामने आए। धार के ग्राम मगजपुरा के खसरा नंबर 29 रकबा नंबर 3-072 को लेकर दस्तावेजों का अवलोकन शुरु किया गया। जिसमें सुधीर दास द्वारा इस शासकीय भूमि को अपनी जमीन बताकर अपने साथियों के साथ मिलकर बेचने की बात सामने आई। ऐसे में पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद पिछले साल नवंबर माह में 28 नामजद सहित एक संस्था को आरोपी बनाया। इस जमीन की कीमत करीब 200 करोड रुपए बताई गई थी, करोडों रुपए कीमत के जमीन को लेकर कोतवाली थाने पर प्रकरण दर्ज किया गया। आरोपी धार से भागते उसके पूर्व ही पुलिस ने पिछले साल ही प्रकरण दर्ज करने के अगले दिन करीब 6 टीमें बनाकर 13 आरोपी हिरासत में ले लिए थे, जिसमें मुख्य आरोपी सुधीर दास भी शामिल था।

धार महाराज ने दी थी जमीन

प्रकरण दर्ज करने के बाद मामले की गंभीरता के चलते एसपी आदित्य प्रताप सिंह ने जांच के लिए एसआईटी टीम गठित की, जिसमें डीएसपी यशस्वी शिंदे, सीएसपी देवेंद्र सिंह धुर्वे, टीआई कोतवाली समीर पाटीदार सहित उनि बीपी तिवारी व सुभाष सुल्या को शामिल किया गया। पुलिस की जांच के दौरान यह बात सामने आई कि करीब 19 अगस्त 1895 में धार स्टेट के महाराज श्रीमांत आनंद राव पवार द्वारा महिलाओं के हॉस्पिटल को लेकर दो स्थानों पर जमीन दी गई थी, जिसमें एक स्थान पर हॉस्पिटल निर्माण सहित दूसरे स्थान पर डॉक्टर को निवास के लिए स्थान दिया गया था। जमीन को शासकीय पटटेदार में यूनाइटेड चर्च ऑफ कनाडिया मिशन धार सेंटर को लेकर संचालक में डॉक्टर मीस होरा ईसाई के नाम से दर्ज किया गया। सन 1905 में अस्पताल का निर्माण पूरा होने के बाद डॉक्टर द्वारा संचालन शुरु किया गया। मीस होरा की मौत के बाद इस हॉस्पिटल सहित जमीन का संचालन यूनाइटेड चर्च ऑफ नार्थन इंडिया के ट्रस्ट के नाम से अंकित किया गया।

देखरेख के दौरान कागजों पर बने मालिक

पुलिस द्वारा जो 9 हजार पन्नों का चालान तैयार किया गया हैं, उसमें कई दस्तावेज शामिल किए है। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार मिस होरा की मौत के बाद सन 1972 में रत्नाकर पीटर दास ने भूमि का देखरेख शुरु किया व संचालन भी जारी रखा। इस दौरान दास का परिवार दूसरी भूमि पर रहकर निवास करने लगा। हालांकि कुछ साल बाद रत्नाकर पीटर दास की मौत हुई व इसके बाद सुधीर दास की कागजों में एंट्री हुई। आरोपी सुधीर दास ने स्वयं को मीस होरा का वंशज बताते हुए जमीन पर अपना मालिकाना हक बताया, जबकि मीस होरा को लेकर कनाडा से जुटाई पुलिस की जानकारी के अनुसार उनका कोई वारिस ही नहीं था। जिसको लेकर भी साक्ष्य चालान में पेश किए गए है। सन 2005 से इस भूमि को लेकर कागजों में हेराफेरी शुरु की गई व अलग-अलग विभागों से जमीन को लेकर दस्तोवज बनवाने का क्रम शुरु हुआ।

8 रुपए स्क्वायर फीट में बेची जमीन

पुलिस द्वारा जुटाए कागजों के अनुसार सन 2010 में भूमि के मालिक बनकर सुधीर दास ने जमीन को बेचने का काम शुरु किया। इस दौरान 14 प्लॉटों को लेकर 36 रजिस्ट्री करवाई गई, उस समय 8 रुपए स्केवेयर फीट जमीन का भाव बताकर आरोपी ने शासकीय जमीन बेची थी। जबकि उक्त भूमि उस समय भी हजारों रुपए स्क्वायर फीट कीमत रखती थी। पुलिस ने जांच के दौरान तत्कालीन एसडीएम सहित नपा के सब इंजीनियर को भी प्रकरण में आरोपी बनाया तथा उन्हें गिरफ्तार करके पूछताछ शुरु की गई। जिसमें यह बात सामने आई कि नपा भूमि का नक्शा, नजूल की अनुमति सहित 165- बी देखकर आरोपियों को निर्माण अनुमति जारी करती थी, हालांकि यह भूमि शासकीय है। इसके बावजूद आरोपियों से सांठगांठ करके शासकीय कर्मचारियों ने भूमि को क्रय-विक्रय करने में मदद की।

सुधीर की एंट्री के बाद करोड़ों में हुए सौदे

पुलिस ने इस मामले में अभिभाषक, होटल व्यापारी सहित भाजपा नेता व कॉलोनाइजर को आरोपी बनाया था, उक्त भूमि को करोडों रुपए में बेचने की पूरी तैयारी पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार दो अभिभाषकों ने की थी। उन्होंने ही कारोबारी सुधीर जैन की जमीन बेचने में इंट्री करवाई थी। सुधीर जैन इस मामले में प्रकरण दर्ज होने के बाद से ही फरार चल रहा हैं, किंतु सुधीर ने इस भूमि को करोडों रुपए में अलग-अलग लोगों को बेचने के लिए सौदे करवाए है। इस जमीन पर उसकी पत्नी के नाम पर भी प्लॉट सहित रजिस्ट्री है। पिछले 10 माह से आरोपी सुधीर जैन, आयुषी जैन फरार हैं, जिनपर इनाम भी घोषित है। इस दौरान पुलिस ने फरार आरोपियों की संपत्तियों को कुर्की करने की कार्रवाई शुरु कर दी, जिसमें गत दिनों धार नगरीय क्षेत्र में मौजूद कुछ संपत्तियों को सील भी कर दिया गया है।

ग्वालियर से जुटाए दस्तावेज

200 करोड़ रुपए कीमत की जमीन को अपनी बताकर खुर्दबुर्द कर औने-पौने दाम में बताकर आरोपियों ने करोड़ों रुपए कमाए थे, पुलिस ने धोखाधडी सहित 8 धाराओं में आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया था। ऐसे में धार पुलिस ने पंजीयक कार्यालय, नपा कार्यालय, धार राजस्व विभाग, इंदौर राजस्व विभाग, रिकॉर्ड शाखा सहित ग्वालियर स्थित कार्यालयों से कागज जुटाए, जिसमें आरोपी सुधीर दास का जमीन पर कही भी मालिकाना हक नहीं होने की बात सामने आई है। शासकीय जमीन को बेचने के चलते पुलिस ने कई विभागों को पत्र भी लिखा व उनका रिकॉर्ड भी बुलवाया तथा कागज भी जप्त किए है। 9 हजार पन्नों के इस चालान में पुलिस ने अलग-अलग विभागों से बुलवाए 5 हजार कागजों की प्रमाणित कॉपियां शामिल की है

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