सागर में BJP से निष्कासित नेता का दर्द: परिवहन मंत्री पर लगाए आरोप, कहा-दहेज में आए कांग्रेसी नेताओं को मिल रहा तवज्जो, भाजपा कार्यकर्ता हो रहे प्रताड़ित


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सागरएक घंटा पहले

मीडिया से बात करते हुए रोने लगे राजकुमार सिंह धनौरा।

नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह के रिश्तेदार राजकुमार सिंह धनौरा को भाजपा ने 6 सााल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। पार्टी से निष्कासित होने के बाद धनौरा ने प्रेसवार्ता में प्रदेश के राजस्व व परिवहन मंत्री और सुरखी विधासनभा से भाजपा के विधायक गोविंद सिंह राजपूत पर जमकर जुबानी हमला बोला। उन्होंने कहा कि में वर्ष 1994 से भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता रहा हूं। मेरा पूरा परिवार जनसंघ के समय से जुड़ा है। मेरे द्वारा सोशल मीडिया पर सुरखी विधानसभा क्षेत्र की जनता की क्षेत्रीय प्रत्याशी की मांग का समर्थन किया गया था। इस आधार पर पार्टी नेतृत्व ने मुझे 6 वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया। क्या यह उचित है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सुरखी क्षेत्र में जिस तरह के हालात हैं उनकी आवाज उठाना चाह रहा था।

अगर में पार्टी में रहता तो मंत्री मेरे ऊपर दबाव नहीं बना पाते। इससे उनके द्वारा झूठे तथ्य पेश कर मुझ पर निष्कासन की कार्रवाई कराई गई। सुरखी विधानसभा में पुराने भाजपा कार्यकर्ताओं पर झूठे प्रकरण दर्ज कराए जा रहे हैं। इसके कई उदाहरण मेरे पास हैं। पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनाव में पुराने भाजपा कार्यकर्ताओं को चुनाव नहीं लड़ने दिया गया। सुरखी में मंत्री गोविंद सिंह के साथ दहेज में आए कांग्रेसी नेताओं को उपकृत किया जा रहा है। वहीं भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं पर प्रकरण दर्ज कराए जा रहे हैं। पार्टी से निकाले जाने का दर्द बताते हुए राजकुमार सिंह धनौरा फफक उठे। रोते हुए उन्होंने कहा कि आज सुरखी क्षेत्र में पुराने भाजपा कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की जा रही है। सुरखी क्षेत्र में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर चल रहा है।मुझसे 80 हजार कमीशन लिया गया थाराजकुमार सिंह धनौरा यह नहीं रुके उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि वर्ष 2000 में मैं जिला पंचायत का सदस्य था। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की पत्नि जिला पंचायत अध्यक्ष थी। उस समय हमारे गांव धनौरा में 2003 में 6 लाख रुपए सीसी मार्ग के लिए स्वीकृत कराए गए थे। जिसमें इन्होंने 80 हजार रुपए कमीशन लिया था। इस समय भी सुरखी क्षेत्र में स्थिति यह है कि कोई भी पंचायत में बगैर मंत्री के पत्र के काम स्वीकृत नहीं होता है। लोगों को योजना का लाभ नहीं मिल पाता है। हर काम में 10 प्रतिशत का कमीशन देना ही पड़ता है।

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