शहीद दादा के साथ बर्थ-डे मनाने की जिद: 3 वर्ष के बेटे को वृद्धाश्रम लेकर पहुंचा पिता, 50 बुजुर्गों के साथ किया सेलिब्रेट

रीवा27 मिनट पहले

तीन साल का प्रियांशु तिवारी अपने दादा के साथ बर्थ डे मनाने की जिद करने लगा। उसके दादा फौज में थे और 2002 में शहीद हो गए थे। 19 अक्टूबर को प्रियांशु का बर्थडे था। पिछले 10 दिनों से वो अपने पिता से दादाजी को घर बुलाने की जिद कर रहा था। रोज सुबह उठते ही जिद करने लगता कि इस बार दादाजी के साथ ही केक काटूंगा। बेबस पिता ने बेटे को समझाया कि आपके दादाजी देश के लिए शहीद हो गए हैं। अब वो भगवान के पास है, वहां से कोई नहीं आता, लेकिन पिता के समझाने का कोई असर मासूम पर नहीं पड़ा तो परिवार के लोग उसे लेकर स्वागत भवन के पास संचालित वृद्धाश्रम पहुंचे। यहां मासूम ने 50 बुजुर्गाें के साथ अपना जन्मदिन मनाया। दादा के प्रति पोते का प्यार देख वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्ग भावुक हो गए।

दैनिक भास्कर से बातचीत में शहीद प्राण नाथ तिवारी की पत्नी पुष्पा तिवारी ने बताया कि कारगिल की जंग के बाद आतंकी कश्मीर छोड़ राजस्थान के जैसलमेर बॉर्डर से घुसने की फिराक में थे। 6 नवंबर 2002 को बॉर्डर पर मुठभेड़ हुई, जिसमें कई आतंकी मारे गए। इसी मुठभेड़ में आतंकी की एक गोली 35 वर्षीय जवान प्राणनाथ तिवारी को लगी और वे शहीद हो गए। हम लोग मूलत: मनगवां क्षेत्र के डेल्ही के रहने वाले हैं। शहादत के बाद मैं बड़े बेटे सोनू तिवारी और छोटे बेटे धीरज तिवारी को लेकर झांसी कैंट आ गई। यहां दोनों बच्चे आर्मी स्कूल में पढ़ाई करने लगे। पति की शहादत के बाद हम लोग रीवा के आनंद नगर में रहने लगे।

बच्चे की बात सुन भावुक हो जाते हैं सभीशहीद की पत्नी ने कहा कि बड़े बेटे सोनू की शादी चार वर्ष पहले हुई। 19 अक्टूबर 2019 को मेरा पोता हुआ। पिछले साल जन्मदिन पर पोता प्रियांशु कहने लगा कि सभी बच्चे अपने दादाजी के साथ जन्मदिन मनाते हैं। हम लोगों ने उसे समझाया। इस बार तीसरे जन्मदिन पर फिर से पोता जिद करने लगा कि दादाजी को बुलाओ तभी बर्थडे मनेगा। पोते की बात सुनकर सभी भावुक हो जाते हैं। दरअसल, हमारे परिवार में कोई बुजुर्ग नहीं है। बेटे की बात रखने के लिए इस बार हम लोग वृद्धाश्रम में जन्मदिन मनाने आए हैं।

अपने पिता सोनू तिवारी और मां प्रियंका तिवारी के साथ तीन वर्षीय प्रियांशु। बच्चे की जिद के बाद प्रियांशु का जन्मदिन वृद्धाश्रम में मनाया गया। बुजुर्गों को सर्दी से बचाने के लिए कंबल भी वितरित किए गए।

अपने पिता सोनू तिवारी और मां प्रियंका तिवारी के साथ तीन वर्षीय प्रियांशु। बच्चे की जिद के बाद प्रियांशु का जन्मदिन वृद्धाश्रम में मनाया गया। बुजुर्गों को सर्दी से बचाने के लिए कंबल भी वितरित किए गए।

दोस्तों के घर जाता तो आकर दादाजी को याद करताप्रियांशु तिवारी की मां प्रियंका तिवारी ने बताया कि छह माह से वह अपने उम्र के कई दोस्तों के जन्मदिन पर उनके घर जाता था। हर जगह बच्चे अपने दादाजी के साथ खेलते-कूदते और केक काटते थे। ऐसे में वह घर आकर कहता, हमारे दादा कहां हैं। एक सप्ताह पहले ही बोल दिया था कि इस बार हैप्पी बर्थडे दादा के साथ मनाउंगा। ऐसे में उसके पापा सोनू तिवारी ने यह प्लान बनाया और हमलोग बच्चे का जन्मदिन घर के बचाज वृद्धाश्रम में मनाने आ गए।

रीवा के स्वागत भवन में संचालित वृद्धाश्रम में केक काटता प्रियांशु तिवारी। जन्मदिन पर प्रियांशु के साथ बुजुर्ग भी खेले और केक खिलाया।

रीवा के स्वागत भवन में संचालित वृद्धाश्रम में केक काटता प्रियांशु तिवारी। जन्मदिन पर प्रियांशु के साथ बुजुर्ग भी खेले और केक खिलाया।

केक काटा और बुजुर्गाें को खिलाया केक, 50 कंबल भी दिएपिता सोनू तिवारी ने बताया कि 3 वर्षीय बेटे की जिद पूरी करने के लिए परिवार सहित बुधवार की शाम स्वागत भवन के पास संचालित वृद्धाश्रम पहुंचे। प्रियांशु ने सभी बुजुर्गों से परिचय प्राप्त किया। इसके बाद केक काटा और बुजुर्गाें के हाथ से ही केक खाया। फिर सभी को केट खिलाया। विदाई के रूप में ठंड से बचने के लिए 50 बुजुर्गों को कंबल दिया। कार्यक्रम की जानकारी लगते ही चोरहटा थाना प्रभारी निरीक्षक अवनीश पाण्डेय और यातायात थाने के सूबेदार अखिलेश कुशवाहा भी मौके पर पहुंच गए।

बर्थडे मनाने तीन साल का प्रियांशु वृद्धाश्रम पहुंचा। कार्यक्रम की जानकारी लगते ही चोरहटा थाना प्रभारी निरीक्षक अवनीश पाण्डेय और यातायात थाने के सूबेदार अखिलेश कुशवाहा भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

बर्थडे मनाने तीन साल का प्रियांशु वृद्धाश्रम पहुंचा। कार्यक्रम की जानकारी लगते ही चोरहटा थाना प्रभारी निरीक्षक अवनीश पाण्डेय और यातायात थाने के सूबेदार अखिलेश कुशवाहा भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

सबको रुलाकर चला गया पोताबुजुर्गों ने कहा कि बच्चा इतना नटखट था कि खुद हंसा और दूसरों को रुलाकर चला गया। बातचीत में वृद्धाश्रम के बुजुर्गों ने कहा कि भगवान करें सबको प्रियांशु जैसा पोता मिले। उसकी ममता की कोई सीमा नहीं है। इसके पहले कोई ऐसा अपनापन दिखाने नहीं आया है। इसे देखकर बचपन से लेकर जवानी और बुढ़ापा याद आया हो। बुजुर्गों ने भी प्रियांशु के साथ खूब मस्ती की। किसी ने उसे कहानी सुनाई तो किसी ने गाना गाकर दादाजी का फर्ज निभाया।

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